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28 साल पुराना रिश्ता टूटने से बचा, लोक अदालत में समझौता




डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में शनिवार को आयोजित स्पेशल लोक अदालत में 1,046 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल 5 करोड़ 98 लाख 76 हजार 877 रुपए के समझौते हुए। लोक अदालत में एनआई एक्ट की धारा-138, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), वैवाहिक विवाद और ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत का संचालन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया। कार्यक्रम कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं संरक्षक-इन-चीफ न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा तथा कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। लोक अदालत में शहर के एक दंपती का मामला भी पहुंचा, जिनकी शादी को करीब 28 साल हो चुके हैं और दोनों बच्चे विदेश में सेटल हैं। निजी कारणों से दोनों ने तलाक की याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एच.एस. ग्रेवाल की बेंच ने दोनों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत की और रिश्ते को एक और मौका देने की सलाह दी। समझाइश के बाद दोनों ने मनमुटाव खत्म कर साथ रहने का फैसला किया और घर लौट गए। 7 स्पेशल बेंचों ने सुलझाए विवाद… जिला कोर्ट के न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में सात स्पेशल बेंचों का गठन किया गया। इन बेंचों ने चेक बाउंस, सड़क दुर्घटना मुआवजा, वैवाहिक विवाद और ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों की सुनवाई कर दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का निपटारा कराया। निरीक्षण के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एच.एस. ग्रेवाल ने कहा कि छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर आपसी सौहार्द बनाए रखने से परिवार मजबूत होता है और बच्चों का भविष्य भी बेहतर बनता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य सिर्फ मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि जहां संभव हो रिश्तों और सामाजिक सौहार्द को भी बचाना है।



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