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गोंडा जेल में बंद विचाराधीन कैदी की मौत:जानलेवा हमले के आरोप में 3 महीने से जेल में थे, 10 दिन से चल रहा था इलाज




गोंडा जिले के मंडलीय कारागार में जानलेवा हमले के मामले में पिछले तीन महीने से बंद विचाराधीन कैदी राम गणेश पाल की रविवार देर शाम करीब 4 बजे लखनऊ के KGMU में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह पिछले 10 दिनों से KGMU में भर्ती थे। कारागार प्रशासन की ओर से लखनऊ में ही शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। भगहरिया पूरे मितई गांव निवासी राम गणेश पाल और मदन मोहन अवस्थी के खिलाफ करीब तीन महीने पहले सोनू नामक युवक ने जानलेवा हमला करने और जातिसूचक गालियां देने का मुकदमा दर्ज कराया था। कौड़िया बाजार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राम गणेश पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं, सह-आरोपी मदन मोहन अवस्थी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। जेल में बंद राम गणेश पाल की 16 सितंबर को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें गोंडा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने 17 सितंबर को उन्हें लखनऊ KGMU रेफर कर दिया था। इसके बाद से उनका इलाज चल रहा था। रविवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पूर्व सपा विधायक ने लगाए लापरवाही के आरोप कटरा बाजार के पूर्व सपा विधायक बैजनाथ दुबे ने राम गणेश पाल की मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम गणेश पाल को राजनीतिक रंजिश के तहत फर्जी मुकदमे में फंसाया गया था। उनके अनुसार, मामले में क्षेत्राधिकारी करनैलगंज की जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में रिवीजन याचिका के जरिए राम गणेश पाल को जेल भेजा गया, जबकि दूसरे आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने जेल प्रशासन पर भी इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर समुचित इलाज नहीं कराया गया और हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया। बैजनाथ दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि परिजनों को सूचना दिए बिना राम गणेश पाल को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी अनुमति के बिना ऑपरेशन कराया गया। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। जेल अधीक्षक बोले- इलाज में नहीं हुई लापरवाही जेल अधीक्षक मृत्युंजय कुमार पांडे ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि राम गणेश पाल पहले से बीमार चल रहे थे। 16 सितंबर को तबीयत खराब होने पर उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद 17 सितंबर को बेहतर उपचार के लिए लखनऊ KGMU रेफर किया गया। जेल अधीक्षक ने बताया कि रविवार को इलाज के दौरान राम गणेश पाल की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है। पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और जांच रिपोर्ट से परिजनों को अवगत कराया जाएगा।



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