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भास्कर न्यूज| लुधियाना दोराहा के अड़ैचा रोड स्थित शिव दयाला मंदिर परिसर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और मंदिर प्रबंधन की ओर से आयोजित पांच दिवसीय भगवान शिव कथा के चतुर्थ दिवस शिव-श्रृंगार के आध्यात्मिक संकेतों पर प्रवचन हुआ। कथा व्यास साध्वी मीनाक्षी भारती ने कहा कि भगवान शिव का श्रृंगार अत्यंत अद्भुत और विलक्षण है, जिसे साधारण बुद्धि से समझना कठिन है। उन्होंने बताया कि शिव के वस्त्र और अलंकार मानव को जड़ शिव से चैतन्य शिव की ओर प्रेरित करने वाले संकेत हैं। उनके अनुसार गले में लिपटे सर्प काल और माया पर विजय के प्रयास का संदेश देते हैं, जबकि भस्म और नर-कपाल जीवन की नश्वरता की याद दिलाते हैं। जटाओं के मुकुट का उल्लेख करते हुए उन्होंने मन को ब्रह्म-केन्द्र पर एकाग्र करने की बात कही और ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरू की शरणागति को आवश्यक बताया। कथा के दौरान साध्वी मनजिंदर भारती, साध्वी नवप्रीत भारती और साध्वी रुपिंदर भारती ने भजनों का गायन किया। चतुर्थ दिवस का समापन प्रभु की पावन आरती से हुआ, जिसमें पवन शर्मा, राकेश कुमार, सुरेश रतन, मुकेश शर्मा और पुनीत मेहता उपस्थित रहे।
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शिव जी के गले का सर्प काल-माया पर विजय का प्रतीक: साध्वी मीनाक्षी
