18 मिनट पहले
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सावन महीने की पहली एकादशी 9 अगस्त को है। इसे कामिका एकादशी कहते हैं। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि सावन में आने वाली इस एकादशी पर पूजा-पाठ और व्रत करने भगवान शिव और विष्णु जी की कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। कामिका एकादशी व्रत सभी कामनाओं को पूरा करने वाला माना जाता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्पण, दान और तीर्थ स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका शुभ असर जीवनभर बना रहता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
स्कंद पुराण में कामिका एकादशी व्रत के बारे में बताया गया है। सावन कृष्ण पक्ष की इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से भक्त के जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों का फल नष्ट होता है, ऐसी मान्यता है। हालांकि केवल व्रत रखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। भगवान विष्णु के सामने यह संकल्प लेना भी जरूरी है कि भविष्य में जानबूझकर कोई गलत कार्य या अधर्म नहीं करेंगे। सच्चे मन और अच्छे विचारों के साथ किया गया व्रत ही पूर्ण फल देने वाला माना जाता है।
भगवान शिव, विष्णु जी और सूर्य देव की पूजा का शुभ योग
सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन सावन महीने की एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इस तिथि पर भगवान शिव और विष्णु जी की विशेष पूजा करने का शुभ योग बनता है। इस बार यह व्रत रविवार को किया जाएगा, इसलिए इस दिन पंचदेवों में से एक भगवान सूर्य का भी विशेष पूजन करना चाहिए। सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें।
ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को बताई थी व्रत की महिमा
पौराणिक कथा है कि कामिका एकादशी व्रत का महत्व स्वयं ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद को बताया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग अपने जीवन में किए गए पापों से मुक्ति पाना चाहते हैं, उन्हें श्रद्धापूर्वक यह व्रत करना चाहिए।
मान्यता है कि कामिका एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को कठिन कर्मों के दोषों से छुटकारा मिलता है। पुराणों में यह भी कहा गया है कि इस व्रत की कथा सुनना भी यज्ञ के समान पुण्य देने वाला शुभ कर्म है। भगवान विष्णु को इस दिन तुलसी के पत्ते अर्पित करने से विष्णु जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
सावन महीने में भगवान विष्णु की पूजा क्यों खास है?
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन महीने में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और धार्मिक कार्यों से मिलने वाला पुण्य लंबे समय तक बना रहता है। इस महीने में भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। शंख में दूध भरकर और पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए। भगवान विष्णु को फूल, फल, दूध, तिल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करनी चाहिए।
ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत
कामिका एकादशी पर भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लेते हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में भगवान को पीले फूल, फल, तुलसी पत्र, पंचामृत और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। पूजा के बाद दिनभर निराहार रहना होता है, जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं, फलों का रस पी सकते हैं। भक्त विष्णु के मंत्रों का जप और भजन-कीर्तन भी करते हैं। कामिका एकादशी पर दान करने की परंपरा भी है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना, वस्त्र दान करना और दक्षिणा देना चाहिए।

