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धार भोजशाला परिसर में रविवार को हनुमान चालीसा का पाठ और मां वाग्देवी की आरती हुई। जूना अखाड़ा, वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत प्रेमगिरि जी महाराज भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी की प्रतिष्ठा तक संघर्ष जारी रहेगा। महंत प्रेमगिरि ने बताया कि भोजशाला का इतिहास सदियों पुराना है। 11वीं शताब्दी में राजा भोज ने यहां संस्कृत महाविद्यालय बनवाया था। यह स्थान संस्कृत शिक्षा और मां सरस्वती की आराधना का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि परिसर की संरचना मंदिर जैसी है, मस्जिद का कोई प्रमाण नहीं। उन्होंने भोजशाला के सर्वे रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कई प्रतिमाएं और धार्मिक प्रतीक मिलने की बात है। महंत ने साफ किया कि हिंदू समाज की मांग पूरी होने तक संत समाज भी इस विषय पर काम करता रहेगा। कार्यक्रम से पहले समिति संयोजक गोपाल शर्मा ने महंत प्रेमगिरि को परिसर का भ्रमण कराया। इस दौरान समिति अध्यक्ष सुरेश जलोदिया, महाप्रबंधक हेमंत दोराया समेत कई सदस्य और श्रद्धालु मौजूद थे।
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जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष धार पहुंचे:कहा- मां वाग्देवी की प्रतिष्ठा तक करेंगे संघर्ष; भोजशाला का इतिहास सदियों पुराना
