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सिंचाई विभाग की चार समितियों संग 8 घंटे वार्ता:हिसार में टेल क्षेत्र के किसानों की समस्याओं पर सहमति बनीं, 32 मुद्दे रखे गए थे




सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारियों और चार किसान जल संघर्ष समितियों के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को हिसार के कैनाल रेस्ट हाउस में करीब आठ घंटे तक बैठक हुई। यह बैठक टेल क्षेत्र के किसानों की नहरी पानी से जुड़ी समस्याओं पर केंद्रित थी। बैठक में नहरों की क्षमता बढ़ाने, रिमॉडलिंग, रैजिंग, मानसून सीजन में पर्याप्त पानी चलाने, टेल तक पूरा पानी पहुंचाने, नहरों में पेंचर रोकने और पानी की चोरी पर अंकुश लगाने जैसे दर्जनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कई मांगों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस वार्ता में पगड़ी संभाल जट्टा, संयुक्त जल संघर्ष समिति, जल संघर्ष समिति और भाखड़ा जल संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ राकेश चौहान ने की। उनके साथ चीफ इंजीनियर मोहनलाल राणा, एसई आत्माराम भाम्भू, एसई जींद पुनीत राय, एसई फतेहाबाद राजेश बिश्नोई, एक्सईएन हिसार आनंद श्योराण सहित भाखड़ा एवं यमुना सिस्टम के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। नहरी पानी से जुड़े 32 मुद्दों को अधिकारियों के सामने रखा संयुक्त जल संघर्ष समिति ने बैठक में नहरी पानी से जुड़े लगभग 32 मुद्दे अधिकारियों के सामने रखे। इनमें बीएमएल बरवाला लिंक की रैजिंग, बरवाला ब्रांच और बालसमंद ब्रांच की क्षमता बढ़ाना व रिमॉडलिंग, बासड़ा-2 सहित अन्य नहरों की रिमॉडलिंग, नहरों की समय पर सफाई और टेल तक पूरा पानी पहुंचाना प्रमुख थे। समिति ने यह भी मांग की कि बारिश के सीजन में जिले की सभी नहरों में पर्याप्त पानी लगातार चलाया जाए, ताकि टेल क्षेत्र के किसानों को सिंचाई पानी की समस्या का सामना न करना पड़े। रिमॉडल की गई नहरों में मिट्टी का काम पूरा करवाने और नहरों की क्षमता के अनुसार पानी चलाने की मांग भी रखी गई। किसान प्रतिनिधियों ने भाखड़ा सिस्टम की नहरों में जगह-जगह हो रहे पेंचर पर रोक लगाने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, नहरों की नियमित सफाई, साइफन व्यवस्था में सुधार और अधिकारियों द्वारा नहरों के टेल तक जाकर औचक निरीक्षण करने की मांग की गई, ताकि पानी के वितरण की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। सीसवाला हेड पर 200 क्यूसेक पानी की मांग बैठक में किशनगढ़ सब ब्रांच को बालसमंद क्षेत्र से जोड़ने और सीसवाला हेड पर न्यूनतम 200 क्यूसेक पानी उपलब्ध करवाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। समिति प्रतिनिधियों ने कहा कि बालसमंद और आसपास के टेल क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त पानी तभी मिल सकता है, जब नहरों की क्षमता और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके अलावा राजस्थान जाने वाली यमुना जल परियोजना से बालसमंद क्षेत्र को अतिरिक्त पानी उपलब्ध करवाने, बरवाला ब्रांच की निर्धारित क्षमता के अनुसार रिमॉडलिंग करवाने तथा बालसमंद सब ब्रांच की क्षमता बढ़ाने की मांग भी अधिकारियों के सामने रखी गई। बासड़ा-2 की रिमॉडलिंग छह महीने में टेंडर की उम्मीद बैठक में बासड़ा-2 नहर की रिमॉडलिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। समिति ने बताया कि इसका प्रोजेक्ट वर्ष 2018 से लंबित है। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि इस परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और करीब छह माह में टेंडर किए जाने की उम्मीद है। समिति ने मांग की कि रिमॉडलिंग के बाद नहरों के किनारों पर मिट्टी का कार्य पूरा करवाया जाए, ताकि कटाव और टूट-फूट की समस्या न हो तथा पानी का प्रवाह सुचारु बना रहे। चार समितियों संग आठ घंटे चली सिंचाई विभाग की वार्ता, कई मुद्दों पर सहमति बनी।



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